Skip to main content

चुनाव में असली औकात पता चलेगा चिराग और पारस की।Next Election will prove the strength of Chirag and Paras

 पटना। न्यूज़। विद्रोही। लोजपा का जारी अंदरूनी संग्राम  का फैसला अब जनता ही करेगी। तत्काल लोजपा की लड़ाई कोर्ट में उलझ जाएगी। इसलिए वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के महाभारत का इंतजार कीजिये। इसके पहले चिराग और पारस गुट की लड़ाई सड़क पर आ जायेगी। भाजपा इसलिए मध्यस्तता नहीं करना चाहती क्योंकि उसे डर है कि नीतीश कुमार नाराज हो जाएंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद  नीतीश कुमार समेत सहयोगी दलों के हौसले बुलंद है। भाजपा फिलहाल दिल्ली की कुर्सी के लिए सबकुछ बर्दास्त करेगी। भाजपा को भी अब कुर्सी का मोह लग गया है। यह पार्टी वसूलों से समझौता नहीं करने का दावा करती थी किन्तु CAA समेत कई मुद्दों को बिहार में उठाने से डरती है।


बहरहाल जदयू और भाजपा दोनों लोजपा की लड़ाई मकुं रहकर देख रहे हैं। ऐसा न हो कि इस लड़ाई को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में बिहार से किसी मंत्री को ही न बनाया जाए। कल पशुपति पारस गुट ने बैठक बुलाई है और इस बैठक में उनके तरफ से नए अध्यक्ष के एलान हो जाएगा। इसके पहले चिराग गट की तरफ से चिराग को ही पार्टी का अध्यक्ष माना गया है। चिराग ने राजू तिवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। इसके बाद लोजपा के प्रदेश कार्यालय पर चढ़ाई के लिए लड़ाई होगी। लेकिन एक बात स्पष्ट है फिलहाल कोई भी गुट अधिक नेताओं के साथ लेने का दावा कर ले पर चुनाव में पासवान वोट चिराग का ही साथ देंगे।पारस, सूरजभान, प्रिंस राज, वीणा देवी , महमूद कैंसर व चंदन सिंह सबकी जमीन खिंसक जाएगी। बिहार के ताजा विधानसभा चुनाव में ही एनडीए की हवा करीब करीब निकल गयी थी। ये सभी नेता वर्ष 2024 के चुनाव में औकात में आ जाएंगे। वास्तविकता यही है। जो काम चिराग ने नीतीश को हराने में किया वही काम अगले चुनाव में भी दोहराया जा सकता है। 

Comments

Popular posts from this blog

चिराग के पीठ में चाकू मार रहे उनके सगे संबंधी और पार्टी के हालात का ठीकरा फोड़ रहे सौरव पर! Chirag relatives and JDU behind LJP faction but Saurav is dragged

 पटना। न्यूज़। लोजपा की टूट कहानी के पीछे कौन है, कौन जिम्मेवार है इसे पूरा देश जान गया है पर चिराग के पीठ में छुरा मारने वाले अपना दोष छिपाने के लिए सौरव पांडेय पर ठिकरा फोड़ रहे हैं। क्या चिराग नौसिखिए हैं कि सौरव पांडेय की बातें मान लेंगे। क्या चिराग में अपनी सोच नहीं है। क्या चिराग ने खुद बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए से अलग होकर लड़ने का निर्णय नहीं किया था। चिराग ने तो अपने पिता स्व. रामविलास पासवान के रहते राजनीति शुरु कर दी थी। तो क्या रामविलास से अधिक धाक सौरव का हो गया था। क्या सौरव के कहने पर चिराग जमुई से चुनाव जीते ? वास्तविकता है कि चिराग में इतनी क्षमता है कि वह खुद निर्णय ले सके। चिराग सारे निर्णय खुद लेते हैं। चूंकि चिराग के चाचा जानते है कि सीधे भतीजा पर दोष गढ़ेंगे तो परिवार आहत होगा इसलिए सारा ठिकरा सौरभ पर फोड़ दिया जाए।  समाज में खुद कुरीतियां फैलाने वाले लोग जिस तरह ब्राह्मण पर ठिकरा फोड़ देते हैं उसी तरह चिराग के पीठ में छुरा भोंककर सौरव पर निशाना साधा जा रहा है। चिराग के करीबी का कहना है कि स्वर्गीय राम विलास पासवान के सलाह पर पारस के जगह प्रिंस को प्रदेश अध्यक्ष बनाया

मिलिए चंद्रशेखर से, हजारों कोविड टेस्ट किये पर खुद निगेटिव रहे। Meet Chandrashekhar who never gets positive while living with thousands positive covid-19 patients

  पटना। न्यूज़। (विद्रोही)। देश में डेढ़ लाख से अधिक लोग कोरोना या कोविड-19 से अब तक मर चुके हैं और यह सिलसिला करीब एक साल बीत जाने के बाद भी जारी है। किंतु इस दुखद गिनती के बीच एक सुखद बिंदु यह भी है कि एक सख्त हजारों कोरोना रोगियों के बीच रहा। पिछले 10 महीनों में घर-घर जाकर हजारों लोगों की जांच किया। इनमें करीब 5 हजार से अधिक लोग कोरोना पॉजिटिव निकले पर वह सख्त कभी कोरोना पॉजिटिव नहीं हुआ। बिहार के उस लैब असिस्टेंट का नाम चंद्रशेखर कुमार है।                  चंद्रशेखर कुमार। फोटो कॉपी राइट चंद्रशेखर का कहना है कि जांच के लिए वह सुबह ही घर से निकल जाते थे। एक दिन में कभी कभी 20-25 लोगों का जांच करना पड़ता था। ये सारे वीआईपी हैं। आईएएस, आईपीएस व वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। चंद्रशेखर बताते हैं कि कभी कभी जांच के दौरान उन्हें जलील होना पड़ता था। मेरे जाते ही ऐसे बर्ताव होता जैसे मैं अछूत हूं। सोफा पर सफेद चादर बिछा दिया जाता था। दूरी मेंटेन की जाती थी, जबकि उनलोगों से हमें संक्रमण होने का डर था।  वे लोग खुद पॉजिटिव निकल जाते। वैसे हजारों पॉजिटिव का स्वैअब निकाला पर खुशनसीब रहा कि खुद पॉजिटिव नही

पीके ने लगा दी बाजी,पश्चिम बंगाल में दहाई को पार करने में तरस जाएगी भाजपा

  पटना। न्यूज़। कभी भाजपा की नैया पार लगाने वाले प्रशांत किशोर,पीके ने दावा कर दिया है कि भाजपा लाख जोर आजम ले पश्चिम बंगाल में उसकी दाल गलनेवाली नहीं है। भाजपा को पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में दहाई पार करने को लाले पर जाएंगे। इस तरह भाजपा सत्ता में नहीं आ सकती। हो सकता है उसे 10 seats भी नहीं मिले। यानी किसी हालत में 99 सीट को भाजपा नहीं पार कर पाएगी। राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पीके ने ट्वीट कर साफ कह दिया है कि लाख कार्यस्तानी के बावजूद भाजपा पश्चिम बंगाल में दहाई भी नहीं छू पाएगी। पीके ने दावा किया है कि यदि भाजपा दहाई का आंकड़ा पर गयी तो वह ट्विटर छोड़ देंगे। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सभा में तृणमूल कांग्रेस के 10 विधायकों ने पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। अमित शाह की इस सभा के बाद ममता बनर्जी खेमे में खलबली मच गई है। पश्चिम बंगाल में पीके ममता बनर्जी के चुनाव प्रबंधक है। डबल डिजिट यानी भाजपा को 10 सीट को भी पार नहीं कर सकती है या वह ज्यादा से ज्यादा 99 सीट तक पहुंचे। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की संख्या करीब 30 फीसदी तक है। एनआरसी जैसे कुछ मामले हैं जो मम