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कहीं बिहार की खिचड़ी दिल्ली में तो नहीं पक रही। Bihar politics is on in Delhi

 पटना। न्यूज़। विद्रोही। बिहार की राजनीति में कुछ उलटफेर की गंध आने लगी है। दिल्ली में राजनीतिक खिचड़ी पकने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही दिल्ली में अपनी आंख का इलाज करा रहे हैं। अब उनके मित्र जीतन राम मांझी भी इलाज के लिए दिल्ली चले गए हैं। उधर केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की भी तैयारी चल रही है। लोजपा के घायल नेता भी दिल्ली में ही हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद भी दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इस तरह दिल्ली फिलहाल बिहार राजनीति का अड्डा बना है। इसी बीच तेजस्वी यादव ने बिहार की एनडीए सरकार टूटने की भविष्यवाणी कर दी है। कुल मिलाकर बिहार की राजनीति को लेकर अंदर ही अंदर कुछ खिचड़ी पक रही है।


इसी बीच आज प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक हुई। दिल्ली से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं में इस तरह जोश भरा जैसे चुनाव में बिगुल फूंका जाता है। नड्डा ने बिहार के अपने नेताओं को नया टास्क दिया है। प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने 6 जुलाई से मंडल स्तर पर कमर कसने की योजना बना ली । साथ ही भाजपा ने आने राजनीतिक प्रस्ताव के जरिये कह दिया कि समान नागरिक संहिता आज समय की मांग है। जाहिर है जदयू की उससे तितकी लगेगी। इस तरह बिहार में भी कुछ खेला का सीन बन रहा है।



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चिराग के पीठ में चाकू मार रहे उनके सगे संबंधी और पार्टी के हालात का ठीकरा फोड़ रहे सौरव पर! Chirag relatives and JDU behind LJP faction but Saurav is dragged

 पटना। न्यूज़। लोजपा की टूट कहानी के पीछे कौन है, कौन जिम्मेवार है इसे पूरा देश जान गया है पर चिराग के पीठ में छुरा मारने वाले अपना दोष छिपाने के लिए सौरव पांडेय पर ठिकरा फोड़ रहे हैं। क्या चिराग नौसिखिए हैं कि सौरव पांडेय की बातें मान लेंगे। क्या चिराग में अपनी सोच नहीं है। क्या चिराग ने खुद बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए से अलग होकर लड़ने का निर्णय नहीं किया था। चिराग ने तो अपने पिता स्व. रामविलास पासवान के रहते राजनीति शुरु कर दी थी। तो क्या रामविलास से अधिक धाक सौरव का हो गया था। क्या सौरव के कहने पर चिराग जमुई से चुनाव जीते ? वास्तविकता है कि चिराग में इतनी क्षमता है कि वह खुद निर्णय ले सके। चिराग सारे निर्णय खुद लेते हैं। चूंकि चिराग के चाचा जानते है कि सीधे भतीजा पर दोष गढ़ेंगे तो परिवार आहत होगा इसलिए सारा ठिकरा सौरभ पर फोड़ दिया जाए।  समाज में खुद कुरीतियां फैलाने वाले लोग जिस तरह ब्राह्मण पर ठिकरा फोड़ देते हैं उसी तरह चिराग के पीठ में छुरा भोंककर सौरव पर निशाना साधा जा रहा है। चिराग के करीबी का कहना है कि स्वर्गीय राम विलास पासवान के सलाह पर पारस के जगह प्रिंस को प्रदेश अध्यक्ष बनाया

मिलिए चंद्रशेखर से, हजारों कोविड टेस्ट किये पर खुद निगेटिव रहे। Meet Chandrashekhar who never gets positive while living with thousands positive covid-19 patients

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पीके ने लगा दी बाजी,पश्चिम बंगाल में दहाई को पार करने में तरस जाएगी भाजपा

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