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Showing posts from January, 2021

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार नहीं होने से बच रहे करोड़ों रुपये।Bihar has saved crores for delaying cabinet expansion!

  पटना। न्यूज़। ( विद्रोही)। बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए नेतागण उतावले हैं पर इस मंत्रिमंडल विस्तार नहीं किये जाने से बिहार के करोरों रुपये बचे हैं। एक अनुमान के मुताबिक बिहार के 100 करोड़ बच जाएंगे। फिलहाल नीतीश सरकार में सीएम समेत 14 मंत्री शामिल हैं। कुल मूल 36 मंत्री बनाये जाने हैं। इस तरह अभी 22 मंत्रियो की वैकेंसीज है। ढाई महीने से ये पद रिक्त है। इन 22 मंत्रियो के लिए 22 स्कोर्पियो चाहिए। 22 ड्राइवर चाहिए। एक मंत्री पर काम से कम 5 सुरक्षाकर्मी चाहिए। तमाम तरह के खर्चा जोड़ लिए जाए तो बिहार के इन ढाई वर्षों में करीब 25 करोड़ की बचत हुई है।                            फाइल  फोटो ऐसा नहीं है कि अधिक मंत्री बना देने से काम अधिक तेज होने लगेगा। मंत्रियों के लाव लश्कर से बचे खर्चे से 100 लोगों की पक्की रोजगार तो मिल ही सकती है। एनडीए सरकार ने 19 लाख रोजगार के अवसर देने के वादे किए हैं। मोदी सरकार को प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 15 लाख दिए जाने का सवाल पीछा नहीं छोड़ रहा है।  भाजपा और जदयू के रिश्ते भी पहले की तरह मजबूत नजर नहीं आ रहे है। आज जदयू के राष्टीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने दिल

नमो देने लगे चिराग को तवज्जो। शामिल हो सकते हैं केंद्र सरकार में! PM Narendra Modi and BJP president JP Nadda both backing Chirag. May be included in Cabinet..

  पटना। न्यूज़। विद्रोही। जो लोग ये भ्रम पाल रहे थे कि बिहार चुनाव के बाद चिराग पासवान की एनडीए से भी छुट्टी हो जाएगी उनका भ्रम अब टूट जाना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी खुद चिराग पासवान को तवज्जो दे रहे हैं। आज दिल्ली में आयोजित एनडीए की बैठक में भाग लेने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय की तरफ से चिराग को न्योता भेजा गया। हालांकि तबियत खराब होने की वजह से बतौर लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान बैठक में भाग नहीं ले रहे हैं। आज ही सर्वदलीय बैठक भी है। बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा भले ही एनडीए के हिस्सा नहीं रही, किन्तु केंद्र में लोजपा एनडीए के हिस्सा है।  सूत्रों के मुताबिक अगले केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में चिराग पासवान को मंत्री भी बनाया जा सकता है। ज्ञात हो कि हाल में स्व. रामविलास पासवान को पद्मभूषण अवार्ड से नवाजा गया। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद जदयू ने केंद्र से भी लोजपा का नाता तोड़ने की रंनिरी अपनायी थी पर दाल नहीं गली। नीतीश के निकटवर्ती भाजपा नेता भी चाह रहे थे कि लोजपा एनडीए से अलग हो जाये पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चिराग को एनडीए में रखने क

लालू भर्ती हुए अस्पताल में, इधर 'घर' में हो गयी भारी सेंधमारी। Lalu led RJD leaders join BJP in mass.

  पटना। न्यूज़। ( विद्रोही)। यह महज संयोग है या राजनीतिक उस्तादी! राजद सुप्रीमो  अपने इलाज के लिए दिल्ली एम्स में भर्ती हैं और इधर पटना में बड़े पैमाने में राजद के बना बनाये 'घर' में सेंधमारी हो गयी। जी हां। लालू के सानिध्य में राजनीति के ककहरा सीखने वाले पूर्व सांसद, पूर्व विधायक व पूर्व पार्षद समेत कई दिग्गज नेताओं को भाजपा ने फोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है। देखिए किन-किन नेताओं को भारतीय जनता पार्टी में शामिल किया गया है। राजद नेताओं को पार्टी में शामिल करने में बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव की अहम भूमिका है। राजद के अलावा कांग्रेस व लोजपा नेताओं को भी भाजपा ने फोड़ा है। 1)  सीताराम यादव, पूर्व सांसद, राजद 2) प्रो० (डॉ) दिलीप कुमार यादव, पूर्व विधान पार्षद, राजद 3)  संतोष मेहता, पूर्व महासचिव, राजद 4)  रामजी मांझी, पूर्व उपाध्यक्ष, राजद 5) श्रीमती नगीना देवी, पूर्व विधायक, लोजपा 6)  सुबोध कुमार पासवान, पूर्व विधायक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 7) श्रीमती अनीता यादव, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता,कांग्रेस 8) श्रीमती मीरा देवी, उप-महापौर,पटना

भाजपा ने अपने प्रदेश महासचिवों और उपाध्यक्षों को अलर्ट किया, दी जिलों की जिम्मेवारी। BJP in alert mode !

 पटना। न्यूज़। (विद्रोही)। जदयू द्वारा जिलों के अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद आज भाजपा ने अपने सभी प्रदेश महासचिवों और उपाध्यक्षों को अलर्ट मोड में करते हुए बिहार के सभी जिलों ओर नजर रखने की जिम्मेवारी दे है। साथ ही युवा मोर्चा को कसने के लिए नए नए पदाधिकारी की तैनाती कर दी है। बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव पटना में डेरा डाल दिये हैं वहीं प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर पर संगठनात्मक ढांचे का कील कवच मजबूत करने में जुटे हैं। बहरहाल बिहार विधानसभा का चुनाव सम्पन्न हो गया है पर जिस तरह नतीजे आये हैं उसे देखते किसी पार्टी को चैन नहीं है। जदयू में एकाग्र छटपटाहट है।भाजपा किसी अनहोनी को लेकर सतर्क है। राजद अवसर के इंतजार में है। सभी घेरेबंदी की तैयारी में है। 

देखिए! जदयू ने बिहार के सभी जिलों में नए 'सामंतों ' की नियुक्ति कर दी । Nitish gives new look to organisation for his forward policy'

  पटना। न्यूज़। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी का कील कवच दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। नीतीश कुमार की सहमति से आज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने सभी जिलों के लिए अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है। विधानसभा चुनाव के बाद भी भाजपा व जदयू के नेताओं ने फुर्सत नहीं ली है दोनों पार्टियां संगठन को धारदार बनाने में जुट गई है। ज्ञात हो कि नीतीश कुमार ने अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। सीएम बनने के बाद नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को नए अध्यक्ष पद की ताजपोशी कर दी है।

लालू को रांची रिम्स से एम्स दिल्ली भेजा गया। Lalu shifted to AIIMS, Delhi

  पटना। न्यूज़। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली एम्स भेज दिया गया है। आज उन्हें एयर एम्बुलेंस के जरिये दिल्ली भेज गया है। साथ मे उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और पुत्र तेजस्वी यादव भी दिल्ली गए हैं। ज्ञात हो कि लालू यादव चारा घोटाला मामले में जेल की सजा काट रहे हैं।

भाजपा के अल्पसंख्यक कार्ड की काट के लिए नीतीश ने फेंका धारदार 'तीर ' Nitish throws minority card to check bjp strategy. '

  पटना। न्यूज़। विद्रोही। भाजपा और नीतीश के बीच प्रदेश में वर्चस्व की मजेदार राजनीति चल रही है। ये ऐसी ही शतरंज की चाल है जैसे दो महाराजा साथ बैठकर एक दूसरे को मात देने के लिए शतरंज की गोटियां फेंकते हैं। भाजपा ने जैसे ही पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन के जरिये अल्पसंख्यक गोटी की चाल चली, नीतीश ने तपाक से अपनी पार्टी में बसपा नेता मो. जमा खान को शामिल कराके भाजपा को शह दे दी। नीतीश की चाल से भाजपा का अल्पसंख्यक दाव उदासीन पड़ गया। नीतीश के इस फेंके तीर से कहीं शाहनवाज हुसैन के मंत्री बनने के अवसर पर पलीता न पड़ जाए। क्योंकि जदयू की तरफ से मो. जमा खान मंत्री बनेंगे।  नीतीश ने यहां जमा खान की गोटी फेंककर भाजपा को जबरदस्त 'शह' दे दिया है। यह 'शाह' का भी खेल हो सकता है। क्योंकि अरसे से शाहनवाज मंत्री पद से पैदल थे। बिहार में उन्हें पांव रखने का अवसर मिला है। लिहाजा बिहार के इस ठंडे मौसम में दिलचस्प गरम गरम राजनीति हो रही रही है। जहां नीतीश सरकार में एक अल्पसंख्यक नेता की दरकार थी वहीं शह मात के खेल में दो अल्पसंख्यक नेता मिल गए। भाजपा के लिए अब अपने वोटबैंक के लिहाज से धर

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा- जदयू में शह मात का खेल! Big bargaining going on between BJP and JDU

  पटना। न्यूज़। ( विद्रोही)। बिहार में मंत्रिमंण्डल विस्तार को लेकर भाजपा और जदयू के बीच शह मात का खेल चल रहा है। भाजपा इस बार 74 सीटें लेकर कतई 43 सीटों वाले नीतीश कुमार के समक्ष बौना नहीं बनना चाहती है। किन्तु जदयू की कोशिश है कि भाजपा को बराबरी पर तौल दें। नीतीश भक्त भाजपा नेताओं को नमो- नड्डा- शाह की तिकड़ी ने पहले ही संदेश भेज दिया है। सुशील कुमार मोदी, प्रेम कुमार और नंद किशोर यादव को पत्ता साफ किया गया। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सबका विकास पार्टी का एजेंडा है। ऐसे में केवल खास लोग ही क्यों मंत्रिमंण्डल का हिस्सा बनते रहेंगे। उस वरिष्ठ नेता का कहना है कि तार किशोर, रेणु देवी भी रफ्तार से काम कर रहे हैं। बहरहाल सुशील कुमार मोदी तो अपनी मारक नीति से राज्यसभा पहुंच गए पर प्रेम कुमार, नंद किशोर यादव और प्रमोद कुमार कुमार सरीखे नेता बगैर मंत्रिपद अस्ताचल की ओर जा रहे हैं। कई पूर्व मंत्री तो दो महीने में ही गुमनामी के अंधेरे में गुम नजर आ रहे हैं। कई पूर्व मंत्री प्रदेश भाजपा कार्यालय में जाते हैं पर उन्हें कोई नोटिश नहीं लेता। ऐसे नेता ड्राइवर को कहते हैं, चल भाई काम हो गया और

नड्डा ने घाटी में मेहनत का तोहफा शाहनवाज को दिया

  पटना।न्यूज़। पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन को आखिर पार्टी ने घाटी का मेहनताना दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शाहनवाज हुसैन को जम्मू कश्मीर की हालिया चुनाव में भेज था। वहां जाकर शाहनवाज हुसैन ने कई सभाएं की। कश्मीर घाटी में पहली बार भाजपा का कमल खिला है। इसका मेहनताना पार्टी ने दे दिया है। हुसैन को  बिहार विधान परिषद में भाजपा भेजेगी।  समझा जाता है कि पार्टी उन्हें बिहार सरकार में मंत्री भी बनायेगी।  भाजपा हमेशा दूर का सोचती है। शाहनवाज हुसैन को मंत्री बनाकर पार्टी पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों को संदेश देना चाहती है।  ज्ञात हो कि शाहनवाज हुसैन अरसे से हासिये पर चल रहे थे। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता तो बना दिया था पर मंत्री पद से वे वंचित थे। अब जेपी नड्डा की नजर उनपर पड़ी है। 

अब नीतीश सरकार में बहाल ट्रांसजेंडर अपराधियों के छुड़ाएंगे छक्के

  पटना। न्यूज़। (विद्रोही)। बिहार सरकार ने पुलिस महकमे में ट्रांसजेंडर/हिजड़ों की बहाली करने की हरी झंडी दे दी है। ये  ट्रांसजेंडर अब बड़े बड़े कुख्यात बाहुबली और कुख्यात अपराधियों के छक्का छुड़ाएंगे। बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी है। जारी अधिसूचना में ट्रांसजेंडर का अनुवाद किन्नर और हिजड़ा किया गया है। इसलिए व्यापक पहुंच और पाठकों को समझाने के लिए यहां हिजड़ा शब्द प्रयोग किया जा रहा है।  वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में ट्रांसजेंडर की संख्या 40827 थी। इस आंकड़े के आधार पर बिहार पुलिस में 10 अवर निरीक्षक और 41 सिपाही ट्रांसजेंडर यानी हिजड़ा समाज से चयनित किये जायेंगे। ज्ञात हो कि बिहार में इनदिनों अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। हाल ही में इंडिगो एयरलाइन्स के स्टेशन मैनेजर रूपेश कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। वे छपरा के जलालपुर गांव के रहनेवाले थे। सूबें में हाल फिलहाल कई लड़कियों के बलात्कार की घटना सामने आई है। पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने राजद की पिछली सरकार को सामने रखकर अपने पक्ष में ध्रुवीकरण किया था। चुनाव प्रचार में

नीतीश के नए 'तीर' से किसका सधेगा निशाना?

 पटना। न्यूज़। जदयू ने आज वशिष्ठ नारायण सिंह के स्थान पर उमेश कुशवाहा को अपना प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। नीतीश कुमार और आरसीपी के सामने महनार के पूर्व विधायक उमेश कुशवाहा की ताजपोशी हुई। इसके पहले आरसीपी सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। इस तरह कुर्मी - कुशवाहा की स्पष्ट छाप जदयू पर पड़ गया है। नीतीश ने लव- कुश समीकरण की घेरेबंदी कर दी है। किन्तु जदयू के इस संकुचित चाल से नीतीश की उदार छवि प्रभावित होगी। जिस तरह राजद से एक खास वर्ग का छाप नहीं हट सका उसी तरह जदयू पर भी कुर्मी कुशवाहा का गहरा छाप पड़ गया है। इस कूप मंडूकता विचार से किसे फायदा होगा इस पर जदयू को ही सोचना होगा।  जदयू में बिजेंद्र यादव, लालन सिंह, जयकुमार सिंह, संजय झा जैसे पारखी नेता मौजूद हैं पर इन सबों पर भरोसा न कर उमेश कुशवाहा पर भरोसा किया गया। जदयू के इस कदम से यह भी पता चलता है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद नीतीश को गहरा चोट लगा है। तभी नीतीश ने कहा है, वह पहचान नहीं सके कि कौन दोस्त है और कौन दुश्मन। कुछ भी हो ताजा कदम से जदयू पर जातिवादी का लांछन भी लग सकता है। जदयू से जो सवर्ण जुड़े हुए हैं उनका

भाजपा व जदयू की तनातनी से मध्यावधि चुनाव की हवा!

  पटना। न्यूज़। ( विद्रोही)। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत से महज 3 सीटें अधिक लेकर नीतीश की अगुवाई में एनडीए सरकार तो बन गयी पर घटक दलों में न तो जश्न का माहौल है और न ही 5 वर्षों तक सरकार खींचने का उत्साह। भाजपा और जदयू दोनों आपसी उलझनों को सुलझाने में जुटे हैं। 9 जनवरी को जदयू के राज्य परिषद व कार्यकारिणी की बैठक में जदयू के कुछ नेताओं ने विधानसभा चुनाव में पिछड़ने का ठिकरा बीजेपी पर फोड़ा है। इसके पहले भी जदयू नेता दबी जुबान में भाजपा को हार के लिए जिम्मेवार ठहराते रहे हैं। किंतु जदयू को इस बात पर भी मंथन करना चाहिए कि उसके खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी हवा थी या नहीं। विश्लेषकों की यह भी राय है कि भाजपा के साथ रहने के कारण उसे 43 सीटें मिल गयी नहीं तो अकेले चुनाव लड़ने पर उसकी और फजीहत हो जाती।  चुनाव के पहले भाजपा नेताओं को इनपुट मिला था कि नीतीश के कारण उसे एन्टी इनकंबेंसी का भी सामना कर पड़ सकता है पर भाजपा के शीर्ष नेताओं ने नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का फैसला किया। जदयू नेता बोगो सिंह साफ कहते हैं कि भाजपा के कारण उनकी पार्टी की हार हुई है पर उनके नेता मंडल यह भी कहते

नीतीश के अगले मंत्रिमंडल विस्तार पर टिका एनडीए सरकार का भविष्य!

  पटना। न्यूज़। (विद्रोही)। भाजपा और जदयू के बीच चल रहे शीतयुद्ध की परिणति बहुत हद तक नीतीश कुमार के अगले मंत्रिमंडल विस्तार पर निर्भर करती है। मंत्रिमंडल विस्तार बहुत हद तक नीतीश सरकार के दीर्घायु जीवन को तय करेगा। साथ ही एनडीए सरकार का भविष्य भी  मंत्रिमंडल विस्तार पर टिका नजर आ रहा है।                            फ़ाइल फोटो फिलहाल मुख्यमंत्री नीतीश को लेकर मंत्रिमंण्डल में 14 मंत्री शामिल हैं। नीतीश के एक मंत्री पहले ही भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गए। सूत्रों से जो छनकर खबरें आ रही हैं उसके अनुसार नीतीश मंत्रिमंण्डल में बराबरी की हिस्सेदारी मांग रहे हैं। भाजपा और जदयू के बीच अनबन का एक कारण यह भी है। भाजपा के 74 विधायक हैं जबकि नीतीश के 43 विधायक हैं। ऎसे में यदि नीतीश बराबरी के हिस्सेदारी पर भाजपा को मना लेते हैं तो यह उनकी बड़ी जीत होगी। लेकिन जनता के बीच यह साफ सन्देश जाएगा कि भाजपा को झुकाने में नीतीश कामयाब रहे। लिहाजा भाजपा और जदयू के बीच शह मात का खेल चल रहा है। यदि नीतीश भाजपा से कम हिस्सेदारी पर राजी हो जाते हैं तो फिर डबल इंजन की सरकार के एक दिशा में जाने पर संदेश को बल मिलेगा। जदयू

रामविलास अपने बेटा की तरह मानते थे सौरव को

  पटना। न्यूज़। ( विद्रोही)।  जो लोग चिराग के मित्र सौरव पांडेय पर उंगली उठा रहे हैं उनके लिए जोर का झटका है। रामविलास पासवान की एक चिट्ठी सार्वजनिक हुई है जिसमे उन्होंने सौरव पांडेय को बेटा कहकर संबोधित किया है।  स्व. रामविलास पासवान ने उस पत्र में लिखा है कि जिस तरह चिराग हैं उसी तरह सौरव हैं। रामविलास पासवान ने बहुत ही भवनात्मक पत्र लिखा है।  स्व. रामविलास पासवान ने लिखा है कि चिराग को ऊंचाईयों पर पहुंचाने में सौरव पांडेय की अहम भूमिका है। एक तरह से रामविलास की इस चिट्ठी से सौरव के सारे विरोधियों की हवा निकल गयी है। जो लोग चिराग और सौरव के बीच दरार डालने की कोशिश कर रहे थे उन्हें जोरदार धक्का लगा है। सौरव पांडेय भी रामविलास पासवान को पापा जी ही कहते हैं। हर वर्ष साल के पहले दिन रामविलास पासवान सौरव पाण्डेय को अवश्य पत्र लिखते थे। उक्त पत्र जनवरी 2020 की है। सौरव इस बार पापा जी का पत्र नहीं मिलने पर भावुक हैं।