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नमो नमो कीजिये व चैन की नींद सोइये! Or prepare for raid. IT raids on Dainik Bhaskar.

  पटना/ नई दिल्ली। यहां नमो से मतलब किसी व्यक्ति से नहीं है और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। जिस तरह शिव की वंदना में नमो शिवाय कहा जाता है वैसा ही अभिप्राय इस खबर में नमो से है। बड़ी खबर यह है कि देश के सबसे बड़े हिंदी समाचार पत्र समूह दैनिक भाष्कर के कई कार्यालयों व इसके कर्मचारियों के घरों पर छापे मारे गए हैं। यूपी में भी भारत समाचार के दफ्तर पर छापा मारा गया है। यहां बृजेश मिश्र एडिटर इन चीफ हैं। प्राप्त सूचना के अनुसार दैनिक भास्कर के जयपुर, भोपाल व अहमदाबाद कार्यालय पर आयकर विभाग का छापा पड़ा है। बहरहाल अबतक जो समाचार पत्र खबर बनाया करता है वह खुद आज समाचार की सुर्खियों में आ गया है। तीन स्थानों के अलावा अन्य स्थानों पर भी छापे मारने की सूचना है। सरकार की तरफ से यह सूचना मिल रही है कि दैनिक भास्कर ने टैक्स की चोरी की है। अनियमितता के कारण छापेमारी चल रही है। दूसरी वजह यह दी जा रही है कि दैनिक भास्कर ने इस कोरोना काल में केंद्र सरकार की कलई खोल दी है। सरकार की नाकामियां उजागर कर उसके नाक में दम कर दिया है। भास्कर ने निर्भीक होकर सत्य को सामने लाया। इसकी कीमत उसे चुकानी पड़ी है
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नीतीश के बयान पर उपमुख्यमंत्री रेणु देवी को कड़ा एतराज, कहा महिलाएं नहीं पुरुषों को शिक्षित करने की जरूरत।BJP leader counters Nitish.

  पटना। न्यूज़। देश मे छिड़ी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने को लेकर बहस के बीच भाजपा व सहयोगी दलों के संबंधों में दरारें पड़ने के संकेत मिलने लगे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून की दलीलें पर असहमति जाहिर करते साफ कह दिया कि इसके लिए महिलाओं को जागरूक करना आवश्यक है। महिलाओं को जागरूक करने संबंधी नीतीश के बयान को भाजपा की वरिष्ठ नेता व प्रदेश की उपमुख्यमंत्री रेणुदेवी ने एक सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने नीतीश को दो टूक शब्दों में सुना दिया कि महिलाओं को नहीं, पुरुषों को जागरूक करना होगा तब जनसंख्या पर नियंत्रण हो सकता है। लिहाजा अब जनसंख्या नियंत्रण को लेकर महिला बनाम पुरुष की लड़ाई  की तरफ मोड़ दिया गया है।

इस भ्रष्टतंत्र में भोग रहे दबंग, लात खा रही बिचारी जनता। People being crushed in faulty system.

 पटना। न्यूज़। (विद्रोही)। मौजूदा हालात में सबसे अधिक  राजनेता, पूंजीपति और दबंग लोग ही चांदी काट रहे हैं और सबसे अधिक मार आम जनता पर पड़ रही है। इस कोरोना के दौर में सबके रोजगार पर असर पड़ा। लाखों बेरोजगार हो गए पर चुने प्रतिनिधि नेताओं पर कोई असर नहीं पड़ा। पेंशन और वेतन उठाते रहे। हॉस्पीटल और और दवा के कारोबारियों की खूब चांदी कटी और आम जनता इलाज कराते कराते लूट गई।  बिहार में समाज कल्याण मंत्री इसलिए इस्तीफा दे दिए कि उनके मन मुताबिक अधिकारियों का ट्रांसफर नहीं हुआ। ट्रांसफर पोस्टिंग में करोड़ो का खेल चलता रहा है। जो अधिकारी लाखों खर्च कर मनचाहा पोस्टिंग लेते हैं वे अंत मे जनता को ही लूटते है। थानेदार झूठे केस में लोग को फंसाकर अपनी पोस्टिंग की एवज में खर्च रुपये को वसूल करता है। जब लखीं खर्च कर अधिकारी पोस्टिंग पाएंगे तो फिर वह नेता या मंत्री को कैसे सुनेगा।  किसी भी डिस्ट्रीक्ट में डीएम की नियुक्ति स्थानीय एमपी या विधायक के सिफारिश पर होती है। ऐसी स्थिति में डीएम या एसपी अपने आका एमपी व विधायक की सुनते हैं चाहे जनता लाख शिकायत करती रहे। कोई अपवाद हो सकता है पर पूरे बिहार या हिंदी बेल्

कहीं बिहार की खिचड़ी दिल्ली में तो नहीं पक रही। Bihar politics is on in Delhi

 पटना। न्यूज़। विद्रोही। बिहार की राजनीति में कुछ उलटफेर की गंध आने लगी है। दिल्ली में राजनीतिक खिचड़ी पकने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही दिल्ली में अपनी आंख का इलाज करा रहे हैं। अब उनके मित्र जीतन राम मांझी भी इलाज के लिए दिल्ली चले गए हैं। उधर केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की भी तैयारी चल रही है। लोजपा के घायल नेता भी दिल्ली में ही हैं। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद भी दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इस तरह दिल्ली फिलहाल बिहार राजनीति का अड्डा बना है। इसी बीच तेजस्वी यादव ने बिहार की एनडीए सरकार टूटने की भविष्यवाणी कर दी है। कुल मिलाकर बिहार की राजनीति को लेकर अंदर ही अंदर कुछ खिचड़ी पक रही है। इसी बीच आज प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक हुई। दिल्ली से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं में इस तरह जोश भरा जैसे चुनाव में बिगुल फूंका जाता है। नड्डा ने बिहार के अपने नेताओं को नया टास्क दिया है। प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने 6 जुलाई से मंडल स्तर पर कमर कसने की योजना बना ली । साथ ही भाजपा ने आने राजनीतिक प्रस्ताव के जरिये कह दिया कि समान नागरिक संहिता आज समय क

लोजपा के फायदे नुकसान को लेकर बीजेपी ने किया आंतरिक सर्वे। BJP gathered internal survey of LJP tragedy

 पटना। न्यूज़। विद्रोही। लोजपा यानी स्व. रामविलास पासवान द्वारा बनाई गई लोक जनशक्ति पार्टी का बिखराव पूरा देश देख रहा है। लेकिन इस बिखराव के बाद बिहार की जनता चिराग पासवान के साथ है या उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के साथ। इस सवाल का जवाब भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जानना चाहती है। जवाब के बाद भाजपा एक्शन में आएगी। बिहार की जनता की राय जानने की जिम्मेवारी पार्टी के खास नेताओं को दी गयी। इनमें कुछ की पहुंच सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है। पत्रकारों से भी राय ली गयी। भाजपा का यह आंतरिक सर्वे पार्टी के शीर्ष नेताओं के  पास दिल्ली पहुंच गया। माना जा रहा है कि आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट पर ही पीएम बिहार मामले पर अहम निर्णय लेंगे। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के सर्वे में स्पष्ट राय है कि लोजपा के उपजे ताजा हालात के बाद बिहार की जनता चिराग पासवान का साथ देगी। खासकर पासवान बिरादरी खुलकर चिराग के साथ है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भाजपा नेतृत्व ने चिराग मसले पर चर्चा की है। साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जदयू के पक्ष मालूम किया गया है। सूत्र बताते हैं कि च

चिराग के पीठ में चाकू मार रहे उनके सगे संबंधी और पार्टी के हालात का ठीकरा फोड़ रहे सौरव पर! Chirag relatives and JDU behind LJP faction but Saurav is dragged

 पटना। न्यूज़। लोजपा की टूट कहानी के पीछे कौन है, कौन जिम्मेवार है इसे पूरा देश जान गया है पर चिराग के पीठ में छुरा मारने वाले अपना दोष छिपाने के लिए सौरव पांडेय पर ठिकरा फोड़ रहे हैं। क्या चिराग नौसिखिए हैं कि सौरव पांडेय की बातें मान लेंगे। क्या चिराग में अपनी सोच नहीं है। क्या चिराग ने खुद बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए से अलग होकर लड़ने का निर्णय नहीं किया था। चिराग ने तो अपने पिता स्व. रामविलास पासवान के रहते राजनीति शुरु कर दी थी। तो क्या रामविलास से अधिक धाक सौरव का हो गया था। क्या सौरव के कहने पर चिराग जमुई से चुनाव जीते ? वास्तविकता है कि चिराग में इतनी क्षमता है कि वह खुद निर्णय ले सके। चिराग सारे निर्णय खुद लेते हैं। चूंकि चिराग के चाचा जानते है कि सीधे भतीजा पर दोष गढ़ेंगे तो परिवार आहत होगा इसलिए सारा ठिकरा सौरभ पर फोड़ दिया जाए।  समाज में खुद कुरीतियां फैलाने वाले लोग जिस तरह ब्राह्मण पर ठिकरा फोड़ देते हैं उसी तरह चिराग के पीठ में छुरा भोंककर सौरव पर निशाना साधा जा रहा है। चिराग के करीबी का कहना है कि स्वर्गीय राम विलास पासवान के सलाह पर पारस के जगह प्रिंस को प्रदेश अध्यक्ष बनाया

सूरजभान की चली।पारस बने लोजपा के अलग धरा के अध्यक्ष। Bihar people will decide the original LJP.

 पटना। न्यूज़। राजनीति गुड्डे गुड़िया का खेल हो गयी है। लोजपा का दो फाड़ तो हो ही गया था अब सूरजभान के इशारे पर पशुपति पारस को नया अध्यक्ष चुन लिया गया। उधर लोजपा के एक ग्रुप का अध्यक्ष चिराग पासवान हैं। यानी एक लोजपा के दो अध्यक्ष हो गए हैं। ये सब बंदरबांट केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह लेने के लिए हो रहा है। जाहिर है यदि पारस मंत्री बनेंगे तो मलाई सूरजभान अधिक खयेंगे। पारस को आगे करने में सूरजभान की महती भूमिका है। पारस तो  बस मुखौटा हैं असली किरदार तो सूरजभान हैं।  चूंकि सूरजभान दबंग नेता है। पूर्व में उनके ऊपर कई आपराधिक केस चल चुका है। सबमें बरी हुए। ऐसे में पारस गुट ने डराने के लिए सूरजभान को आगे कर दिया। सूरजभान के आवास पर ही पशुपति पारस को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया। चिराग कहते हैं वह सिद्धान्त की राजनीति कर रहे हैं। उन्हें दबंग व बाहुबली नेता पसंद नहीं है। अब जनता जनार्दन तय करेगी कि असली नकली कौन है। लेकिन एक बात स्पष्ट है कि  जात की राजनीति खुलकर हो रही है। पारस गुट में भूमिहार का बोलबाला है जबकि पार्टी की मूल राजनीति पासवान पर टिकी है। दरअसल भाजपा के एक खास वोटबैंक पर सेंध मा