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ये इमरजेंसी नहीं, अमृतमहोत्सव है! This is the polite of journalists in democracy.



 पटना। न्यूज़। केंद्र सरकार देश मे आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर उत्सव मनाया जा रहा है। दूसरी तरफ सच लिखने वालों को जेल में बंद किया जा रहा है। उसे नंगा किया जा रहा है। ये कैसी आजादी है। 100 बातें आपकी प्रशंसा में लिखे और एक बात अप्रिय सत्य लिख दिया तो कोरे बरसा दिए। नंगा कर दिये और जेल में भेज दिया। यहां बात मध्यप्रदेश में नंगा किये पत्रकारों की नहीं हो रही। ये बात पुरानी हो गयी। बात बलिया की हो रही है जहां मैट्रिक परीक्षा में पर्चा लीक की बात लिख दी तो तीन पत्रकारों को जेल भेज दिया। 12 दिनों से पत्रकार जेल में बंद हैं। दो पत्रकार अमर उजाला के हैं तो एक राष्ट्रीय सहारा का है। बलिया में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहा है। डीएम ने बिना एफआईआर के पत्रकारों को जेल में बंद कर दिया।


ये वही बलिया है जहां के मंगल पांडेय ने स्वतंत्रता संग्राम की आग लगाई। पत्रकारों का क्रमिक संघर्ष जारी है। जाहिर है पत्रकारों को जेल में बंद करने के पीछे योगी सरकार का इशारा होगा।


मध्यप्रदेश में नंगा किये गए पत्रकारों का हाल भी देख लीजिए।


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